glimpse
Friday, April 28, 2017
jindagi
aaj में में बहुत दिनों बाद इधर कुछ लिख रहा हु क्यों की पिछले कुछ वक़्त से जिंदगी ने अजीब करवट ली है नवंबर १५ के बाद बुटान पर भी नहीं बीत रहा है आखिर मेरा जीवन साथी जो मेरे साथ हर दुःख सुख में साथ था अचानक ही मेरा संग छोर गया मुझे ही नहीं पूरा परिवार अब उसके बगैर रहने को मजबूर है यह ईश्वर की लीला जनता है ऐसा क्यों ?बचे अकेले है अभी उनकी शाद्दी भी नहीं हुई वो दुनिया से बेवाक़िफ़ है।
अब मई ही उनका माँ बाप दोनों हु पर कब तक यह चलेगा आज करीब माह बीत गए पत्ता नहीं ईश्वर क्यों नाराज़ है ? उसकी लीला वो ही जाने। मेरी तो उनसे यह प्राथना है की वो बचो को शीग्र उनका हमसफर दिला दे ताकि वो सब भूल कर नई लाइफ शरू कर सके पर भगवान् राजी होता है यह उनको ही खबर है मई तो रोज़ कौशिक करता हु।
अब मई ही उनका माँ बाप दोनों हु पर कब तक यह चलेगा आज करीब माह बीत गए पत्ता नहीं ईश्वर क्यों नाराज़ है ? उसकी लीला वो ही जाने। मेरी तो उनसे यह प्राथना है की वो बचो को शीग्र उनका हमसफर दिला दे ताकि वो सब भूल कर नई लाइफ शरू कर सके पर भगवान् राजी होता है यह उनको ही खबर है मई तो रोज़ कौशिक करता हु।
Tuesday, March 28, 2017
health
it is really strange that i write here since long life was so bisy in last few months and health was also not well family was disturb about me for health . anyhow i am now well and here .
Saturday, October 15, 2016
jindagi
ये दुनिया ये दुनिया हाय हमारी ये दुनिया जिधर देखो अजीब नज़ारा कही ठहाके लगते लोग कही रोते हुए लोग कही झोंपढ़ी में सोते लोग कही महलो में सोते लोग कही मंदिर में होते पूजा करते लोग कही शराबखाने में पीते शराब लोग कही मिलते प्यार करते लोग तो कही मिलते झगड़ते लोग ये दुनिया ये दुनिया हाय हमारी ये दुनिया सच है ज़िन्दगी को समझना बहुत मुश्किल काम है व्यक्ति इस दुनिया में आता है अपनी मर्ज़ी से नहीं न ही जाता है अपनी मर्ज़ी से ये सब ईश्वर की मर्ज़ी से चलता है जो उसे मंज़ूर होता है वो ही होता है यह सृष्टि का नियम है पर जिंदगी कैसे गुजरे यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कैसा वो दूसरे व्यक्ति से व्यवहार करे और मेल मिलाप बढ़ाये और एक दूसरे के प्रीति काम आये और जिंदगी खुशाल बने जब तक जिन्दा रहे इस अनोखी दुनिया में ये बहुत जरुरी है की वो दोनों एक दूसरे को अछि तरह समझे और विचारो को आदान प्रदान करे विचारो का मिलना एक दूसरे को और करीब लाएगा वो अधिक देर आपस में मिल कर एक दूसरे के दुख दर्द समझेंगे जो अधिक जरुरी है जीवन गुजारने के हज़ारो वस्तुओ की जरुरत होती है कही होती है कही नहीं होती कही के लिए मेहनत करनी परती है कही आसानी से मिल जाती है यह सुर्ष्टि का नयम है की व्यक्ति खुदगर्ज़ होता है वो पहले अपने लिए सोचता है फिर परिवार के लिए फिर यार दोस्तों के लिए फिर समाज के लिए खुदगर्ज़ होना बुरा नहीं है पर खुदगर्ज़ी के लिए दूसरे की चीजे हरप ले या पाने के लिए उसे दुःख देवे यह नैतिकता का पतन है व्यक्ति को सबसे पहले प्यार से हर व्यक्ति से बात करनी है प्यार कभी भी नफरत या ईर्ष्या में तब्दील नहीं होना चाहिए यहाँ ही व्यक्ति की जीत है उसी में ही जिंदगी का मज़ा है इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति सम्पूर्ण नहीं है हर एक में कोई न कोई कमी होती है तो दूसरे व्यक्ति को कभी भी दूसरे की कमी को न देखनी चाहिए उसके हमेशा गुण देखने चाहिए ये अछि जिंदगी गुजरने का सार है
Sunday, September 18, 2016
love
प्यार होता है क्या पूछो दिल से मेरे
इक आग सी लगती है इस दिल में
रह रह कर इक जलन सी लगती है इस दिल में
सर्द हवा का झोका सा आकर गया इस दिल से
फिर तरफ सी लगती इस दिल में देर तक
की अहसास सा लगता कि गुजर गया कोही नज़दीक से
इक आग सी लगती है इस दिल में
रह रह कर इक जलन सी लगती है इस दिल में
सर्द हवा का झोका सा आकर गया इस दिल से
फिर तरफ सी लगती इस दिल में देर तक
की अहसास सा लगता कि गुजर गया कोही नज़दीक से
Saturday, August 6, 2016
mousam
फिर सुबह की वेला आई पंछीयो की ची ची आई
कोयल की कु कु मन को लुबाई
भवरे की घु घु फूलो पर मंडराई
फिर बादलो की घुमर घुमर आई
रिम झिम रिम झिम बारिश आई
फूलो पर फिर जवानी आई
लगे झूमने और इतराने
क्यों न मन हो मतवाला हम सभ का
देख समां सुहाना जवानी फिर वापस आई
कोयल की कु कु मन को लुबाई
भवरे की घु घु फूलो पर मंडराई
फिर बादलो की घुमर घुमर आई
रिम झिम रिम झिम बारिश आई
फूलो पर फिर जवानी आई
लगे झूमने और इतराने
क्यों न मन हो मतवाला हम सभ का
देख समां सुहाना जवानी फिर वापस आई
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