Saturday, October 15, 2016

jindagi

ये दुनिया ये दुनिया हाय  हमारी ये दुनिया जिधर देखो अजीब  नज़ारा कही ठहाके लगते लोग कही रोते हुए लोग कही झोंपढ़ी में सोते लोग कही महलो में सोते लोग कही मंदिर में होते पूजा करते लोग कही शराबखाने में पीते शराब लोग कही मिलते प्यार करते लोग तो कही मिलते झगड़ते लोग ये दुनिया ये दुनिया हाय हमारी ये दुनिया सच है ज़िन्दगी को समझना बहुत मुश्किल काम है व्यक्ति इस दुनिया में आता है अपनी मर्ज़ी से नहीं न ही जाता है अपनी मर्ज़ी से ये सब ईश्वर की मर्ज़ी से चलता है जो उसे मंज़ूर होता है वो ही होता है यह सृष्टि का नियम है पर जिंदगी कैसे गुजरे यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कैसा वो दूसरे व्यक्ति से व्यवहार करे और मेल मिलाप बढ़ाये और एक दूसरे के प्रीति काम आये और जिंदगी खुशाल बने जब तक जिन्दा रहे इस अनोखी दुनिया में ये बहुत जरुरी है की वो दोनों एक दूसरे को अछि तरह समझे और विचारो को आदान प्रदान करे विचारो का मिलना एक दूसरे को और करीब लाएगा वो अधिक देर आपस में मिल कर एक दूसरे के दुख  दर्द समझेंगे जो अधिक  जरुरी है  जीवन गुजारने के हज़ारो वस्तुओ की जरुरत होती है कही होती है कही नहीं होती कही के लिए मेहनत  करनी परती है कही आसानी से मिल जाती है यह सुर्ष्टि का नयम है की व्यक्ति खुदगर्ज़ होता है वो पहले अपने लिए सोचता है फिर परिवार के लिए फिर यार दोस्तों के लिए फिर समाज के लिए खुदगर्ज़ होना बुरा नहीं है पर खुदगर्ज़ी के लिए दूसरे की चीजे हरप ले या पाने के लिए उसे दुःख देवे यह नैतिकता का पतन है व्यक्ति को सबसे पहले प्यार से हर व्यक्ति से बात करनी है प्यार कभी भी नफरत या ईर्ष्या में तब्दील  नहीं होना चाहिए यहाँ ही व्यक्ति की जीत है उसी में ही जिंदगी का मज़ा है इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति सम्पूर्ण नहीं है हर एक में कोई न कोई कमी होती है तो दूसरे व्यक्ति को कभी भी दूसरे की कमी को न देखनी चाहिए  उसके हमेशा गुण देखने चाहिए ये अछि जिंदगी गुजरने का सार है 

Sunday, September 18, 2016

love

प्यार  होता है क्या पूछो दिल से मेरे
इक आग सी लगती है इस दिल में
रह रह कर इक  जलन सी लगती है इस दिल में
सर्द  हवा का झोका सा आकर गया इस दिल  से
फिर तरफ सी लगती इस दिल में देर तक
की अहसास सा लगता कि गुजर गया कोही नज़दीक से


Saturday, August 6, 2016

mousam

फिर सुबह की वेला आई पंछीयो की ची ची आई
कोयल की कु कु मन को लुबाई
भवरे की घु घु फूलो पर मंडराई
फिर बादलो की घुमर घुमर आई
रिम झिम रिम झिम बारिश आई
फूलो पर फिर जवानी आई
लगे झूमने और इतराने
क्यों  न मन हो मतवाला हम सभ का
देख समां सुहाना जवानी फिर वापस आई 

Sunday, June 12, 2016

सितारों के आगे ये कैसा जहाँ है
न जमीं न  आसमा है
दूर तक दीखता नहीं और कोई भी
या यह मेरे कल्पना से पर है


Sunday, May 22, 2016

जि दगी हर व्यक्ति के लिए अहम है चाहे वो किसी की ही क्यों न हो यह हर व्यक्ति  का परम कर्तव्य है की वो हर जीव की रक्षा  प्राणों जैसी करे ईश्वर ने हर जीव को  में अच्छी जिंदगी बिताने  के लिए भेजा है की वो हर जीव से प्यार करे उनके कार्यो में मदत करे न की विरोध करे ईश्वर की बनाई इस दुनिया में   व्यक्ति उतने ही दिन रह सकता है जितना मालिक ने निश्चित कर रख है न काम न ज्यादा।
हमें हर वक्त ईश्वर का नमन करना चाहिए की उसने हमें इस फानी दुनिया में  कर्म  भेजा है।
यह बिलकुल सत्य है की दुःख सुख हर व्यक्ति के  है परन्तु हर  परम कर्तव्य   हर व्यक्ति की सहायता करे न की उसके मरमो को और दुःख  पहुचाये 

Thursday, May 5, 2016

rahsya

क्यों  होती है सोच आगे की
क्यों आती है याद  बार बार उसकी
क्यों नहीं जाती वो दिल और दिमाग से
क्या कहना चाहती है आखिर वो मेरे दिमाग को
क्यों नहीं में समझता में उसके इशारों को
क्या रहस्य है आखिर उसके बार बार आने को
क्या में नादान समझ पाउँगा उसके इशारों को
क्या यह कोई प्यार का अजीब अहसास है मेरे अंदर
कैसे पाऊ में मतलब इस अजीब पहेली का
है जरूर कुछ इन इशारों में जो कहना चाहती है वो अब तक
कर दे ईश्वर कुछ ऐसा की में मतलब पाह जाऊ जल्दी इस गुथी का

Wednesday, March 16, 2016

याद

तुम जिनदगो को गम का फसाना बना गए अाखो में इनतजार की दुनिया बसा गए

या द

अा बहुत दिनों बाद में लिख रहा हूँ पिछले कई महीनों से दिल बहुत उदास था बिबि बहुत याद अा याद अा रही थी

Saturday, January 30, 2016

ishwar ka insaaf

aaj bahut dino baad me idhar subah subah kuchh man ki baat likhne aaya hu ,ishwar ki banai is duniya me ajeeb ajeeb bate dekhne ko milti hai jo insaan ki jindagi me ajeeb se morh me le jati hai aur jindagi ka rukh badal deti hai ,ishwar ki leela adbud hai ham use challenge nahi kar sakte par gila to swat nikal jati hai ki hai ishwar ye kiya kar diya ?
khubsurat hasti gati zindagi me khalal daal diya jis ki vajah se ghar pura pariwaar khila khila sa rahta tha isme ek thahraw sa aa gaya sabhi heran aur achambit hai aur ishwar ke insaaf ko kothu nazaro se nihar rahe hai ,ki ye kyo ye kyo ?
jiske muskarane se ghar pure pariwaar me ronak rahti thi wo sunsaan ho haya ,uski hasi se ghar me ghunj uthti thi wo ghar ab chupchap hai aur idhar udhar nihar raha hai jaise kisi ka besbri se intazaar ho ,ankhon se aasoo tham nahi rahe hai rah rah kar tej dhara ban kar nikal parte hai .kyo mail akhir kyo ?
aaj 62 din beet gaye hai malik ke us kruh faisale ko ,abhi uski umra hi kya thi .
wo ghar pariwaar ki ronak thi, wo ghar ki lakshami thi ,wo bacho ki maa aur ek dharampatni thi .ab ghar kaise chalega abhi to bahut karya karne hai ishwar sabko bal pradaan kare ki wo adhure rahe karyo ko pura kar sake .