Wednesday, October 26, 2011

insaan

वाह मालिक अजब तेरी दुनिया
न रिश्ते है न प्यार है ,केवल दिखावा है

अगर प्यार नहीं तो ये दिखावा क्यों
क्यों कमजौर है इतना इंसान जहाँ में

है अंदर में कुछ और बाहर कुछ और
क्यों सोच अलग है सच कहने से

इससे अच्छा है रहे दूर वो न आये पास कभी
कमसे कम यह तो रहेगा कि है इक इन्सान अपना दूर कही

Sunday, October 16, 2011

dil

क्यों कर आखिर समजाऊ इस दिल को बार बार
क्यों भटकता है आखिर दिल बार बार समजने को

ये दर्द की दुनिया है समेटे हर इक दर्द पिलाने को
कहाँ तक इंसान सहेगा इस बेदर्द ज़माने को

रहम कर ऐ खुदा इस बन्दे पर रहने को इस ज़माने में
कि भेजा है आखिर आपने इस बन्दे को ज़ालिम ज़माने में

pyar

कभी कभी अजीब सा लगता है
कभी कभी खुबसूरत लगता है

कभी कभी मन को लुबाने लगता है
कभी कभी मन को उचकाने लगता है

पूछोगे नहीं आखिर है क्या ये कभी कभी ?
हां हुजुर यह प्यार है ,इक अहसास है .

ये सच है कुछ नहीं है इस जहाँ में बिन प्यार के
छलावा लगती है ये दुनिया बिन प्यार के जीने में


Saturday, October 15, 2011

mohbbat

कभी महसूस होता है अकेला हु ,कभी महसूस होता है सब साथ है
कैसी ये उलझन है ,कैसी ये बेचेनी है ,लगता है पीछे रह गया हु सबसे

क्यों होता है इंसान खफा सबसे ,कही यह तो नहीं खफा है अपने से
लिखा है सब किताबो में कि प्यार सबसे ऊपर है इस जहाँ में ,पर है कहाँ

मोहब्बत ,प्यार ,इश्क मरना ,मिटना ,है सब किताबो कि दुनिया इस जहाँ में
है और भी बहुत काम इस जहाँ में ,कि नहीं है सिर्फ मोहब्बत इस जहाँ में

अफसाने  बनते है बिगरते है इस जहाँ में रोज़ कि किस्से रह जाते है यादों में
कि खुश रह ऐ दोस्त इस जहाँ में ,कि नहीं है सिर्फ मोहब्बत इस जहाँ में