वाह मालिक अजब तेरी दुनिया
न रिश्ते है न प्यार है ,केवल दिखावा है
अगर प्यार नहीं तो ये दिखावा क्यों
क्यों कमजौर है इतना इंसान जहाँ में
है अंदर में कुछ और बाहर कुछ और
क्यों सोच अलग है सच कहने से
इससे अच्छा है रहे दूर वो न आये पास कभी
कमसे कम यह तो रहेगा कि है इक इन्सान अपना दूर कही
