लूटता है आदमी को आदमी ,घर आदमी का जलाता है आदमी
जान लेता है आदमी कि आदमी ,खून आदमी का बहाता है आदमी
कितना बेबस है फिर भी ,हाथ खाली जाता है आदमी
इतना खुदगर्ज़ है कि कागज़ के टुक्रो पर बिक जाता है आदमी
नीलाम करता है अपने खुद का जमीर ,खुद ही अपनी बोली लगता है आदमी
कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी
करता है फरेब अपनों से ,लहू अपनों का बहाता है आदमी
शोहरत कि होढ में ,नाम कितना मिटाता है आदमी
कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी
दर्द कितना सहता है ,कितने गम उठता है आदमी
बुझा कर रात रहते ही चिराग ,रौशनी कल के लिए बचाता है आदमी
कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी
चार दिन कि जिंदगी में आराम का हर सामान जुटाता है आदमी
कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी
Sunday, August 29, 2010
yade
रात का भी अजब आलम होता है
देख तारो को यादे छाही रहती है
मदहोश कर देती है उनकी आहट पर
कि वोह नहीं केवल कल्पना है उनकी
क्या होगा जब रूबरू होंगे उनसे
यह सोच पसीने पसीने होई जाते है
या खुदा ये ख्वाइश है अब मेरी
कि उनकी यादो में ही खोही रहू जीवन भर
देख तारो को यादे छाही रहती है
मदहोश कर देती है उनकी आहट पर
कि वोह नहीं केवल कल्पना है उनकी
क्या होगा जब रूबरू होंगे उनसे
यह सोच पसीने पसीने होई जाते है
या खुदा ये ख्वाइश है अब मेरी
कि उनकी यादो में ही खोही रहू जीवन भर
khwab
आशा इक किरण है जिदगी कि
आशा इक खुबसूरत ख्वाब है
आशा जीने कि चाहत है जिंदगी
कि जिंदगी इक खुबसूरत लम्हा है हर पल
कि आनंद और मज़ा है इन ख्वाबो में
कि आशा इक खुबसूरत ख्वाब है
क्या कभी पूछा है ख्वाबो से जी भर कर
कि कब हसी बन कर गले लगगे मुझ से
आयेगे जरूर आयेगे मुझे गले लगाने
कि स्वागत में आँखे बिछाए द्वार खरी हु में
आशा इक खुबसूरत ख्वाब है
आशा जीने कि चाहत है जिंदगी
कि जिंदगी इक खुबसूरत लम्हा है हर पल
कि आनंद और मज़ा है इन ख्वाबो में
कि आशा इक खुबसूरत ख्वाब है
क्या कभी पूछा है ख्वाबो से जी भर कर
कि कब हसी बन कर गले लगगे मुझ से
आयेगे जरूर आयेगे मुझे गले लगाने
कि स्वागत में आँखे बिछाए द्वार खरी हु में
Saturday, August 28, 2010
pyar
ये माना कि तुम जीवन संगनी हो
ये माना कि तुम मेरी अर्धांग्नी हो
ये माना कि तुम मेरी जीवन सफ़र हो
ये माना कि तुम मेरी अमिट मित्र हो
ये माना कि यह सुहाना सफ़र है
ये माना कि हम साइकिल के दो पहिये है
पर तुम मानों यह बात जीवन भर
कि हम इक दुसरे के लिए जन्मे है
ये माना कि तुम मेरी अर्धांग्नी हो
ये माना कि तुम मेरी जीवन सफ़र हो
ये माना कि तुम मेरी अमिट मित्र हो
ये माना कि यह सुहाना सफ़र है
ये माना कि हम साइकिल के दो पहिये है
पर तुम मानों यह बात जीवन भर
कि हम इक दुसरे के लिए जन्मे है
Thursday, August 26, 2010
pyar
तुम मेरे प्यार हो इस जीवन के पतवार हो
नहीं चलेगी अकेले यह जीवन कि रस भरी नैया
नहीं चाहिए मुझे कुछ और तुमरे सिवाह
कि तुम्ही हो मेरे सब कुछ खेवनहार पिया
सब कुछ मिला है मुझे इक तुम्हे पाकर पिया
अब और नहीं इच्छा इस परवरदिगार से पाने कि
नहीं चलेगी अकेले यह जीवन कि रस भरी नैया
नहीं चाहिए मुझे कुछ और तुमरे सिवाह
कि तुम्ही हो मेरे सब कुछ खेवनहार पिया
सब कुछ मिला है मुझे इक तुम्हे पाकर पिया
अब और नहीं इच्छा इस परवरदिगार से पाने कि
Sunday, August 22, 2010
pyar
तुम से जीना सीख लिया
तुम से मरना सीख लिया
न अब कोही गम दुनिया से
कि अब मर जिह कर देख लिया
यह सच है तुम प्यार से प्यारी हो
यह सच है तुम जान हमारी हो
पर न सिखाया हमको दूर जाने को
न रहोगे तुम अगर मर जायेंगे हम
तुम से मरना सीख लिया
न अब कोही गम दुनिया से
कि अब मर जिह कर देख लिया
यह सच है तुम प्यार से प्यारी हो
यह सच है तुम जान हमारी हो
पर न सिखाया हमको दूर जाने को
न रहोगे तुम अगर मर जायेंगे हम
jadu
उसकी आँखों में वो जादू है
करती है बेहोश सभी को
अगर होश में रहे मदहोश लगते है
न होश रहे कुछ करने को
तुम्हे वास्ता है खुदा का
न देख यु जी भर कर सभी को
कि देखने वाले लाइन में लगे है
यु मिट कर मरने वालो में
करती है बेहोश सभी को
अगर होश में रहे मदहोश लगते है
न होश रहे कुछ करने को
तुम्हे वास्ता है खुदा का
न देख यु जी भर कर सभी को
कि देखने वाले लाइन में लगे है
यु मिट कर मरने वालो में
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