Friday, December 24, 2010

जिंदगी अजीब सी पहेली है
इक अजीब सी सहेली है

क्यों न गले लगाये इसको
क्यों न मुस्कराए इससे

क्यों न इतराए हम मिलके इससे
क्यों न गले लगाये इसको

Tuesday, December 14, 2010

pyaar

क्यों है ये ज़िन्दगी इतनी खफा हमसे
क्यों है खुशिया दूर इतनी सदा हमसे

क्या प्यार अब किताबे के किसे है केवल
क्या मतलब बदल गया प्यार का इस जहाँ में

क्या रिश्ते ,क्या नाते ,क्या दोस्त, क्या हम प्याले
अब नज़र आता है हर कही पैसा और पैसा और पैसो का प्यार

ऐ दोस्त मत भूल कि यह है चलता सिक्का ,नहीं रुकता  कही
क्या मुकाबला करेगा ये प्यार से कि खुद का  कोही ठिकाना नहीं

Thursday, December 9, 2010

patther raah ka

यह पत्थर  है राह का ,देखता है हर इक को
जो न देखे इसे राह में ,धूल में मिलता है वोह

कुदरत का अजब करिश्मा है ये ,काम आता है यह सब के
रहने को देता है साथ सबको ,कि महल भी बनवाता है किसी का

कि फोढ़ देता है सर भी किसी का ,कि नज़रे फेर दी किसी ने
कि ऐ इंसान सँभाल कर चल ,कि कभी मंदिर में पूजता है यह पत्थर

कि न कर गुमान ऐ इंसान इस जग में ,बसता है ईश्वर हर किसी में
मत भूल कि कुछ न लाया था इस जग में ,न भूल कि कुछ न ले जाएगा इस जग से

Wednesday, November 17, 2010

pyar

आखिर यह प्यार क्या चीज है
जिसमे हम सभी बेबस है इसे पाने को
लगता है सब सूना अपने चारो और
भुझी भुझी सी आँखे भुझा भुझा चेहरा
लगती है खामोश फिझाए हर कही
नहीं लगता योवन इन उमरती घटाओ  में
नहीं दिखती खिलखिलाहट इन रंगीले फूलो में
कि प्यार नहीं है मेरा इन चाहत भरी नजरो में

pyar

क्यों कोही पूछे मुझसे ये राज़ कि बाते
कि वोह न था कभी राजदार मुझसे कभी

बीत गयी वो राते ,बीत गयी वो बाते
बीत गए वो पल ,बीत गयी वो प्यार भरी बाते

यादगार रह गए वो सुनहरे प्यार भरे पल
याद रह गई वो वोह प्यार भरी कसमे

न भुला पाहुंगा में यह सभी जीवन भर
कि तुम आज भी बसी हो मेरे तन मान में

Tuesday, November 9, 2010

sapne

सपने जरुर होने चाहिए हर जिंदगी में
कि उसे पूरा करने में अपने को डाल देना चाहये

कि सपने अपनी उमीद है कि सपने अपनी आशा है
कि सपनो में जीने का अपना निराला अंदाज़ है

क्यों नहीं होंगे पूरे  सपने हर इंसान के इस धरती पर
कि बेइंतिहा सौन्द्रिय बिखरा परा है इस धरती पर

क्यों नहीं जिए हर वो ख़ुशी से इस संसार में
कि नहीं मिलती मानव योनी हर इक जीव को संसार में

Saturday, November 6, 2010

adbudh jeevan

सर्द सर्द पवन के झोंके लिए इस सुबह का स्वागत है
कि रात अभी अभी ख़तम हुई है काले सायो के साथ

सूर्य कि उजली धुप मानो दे रही है नया सन्देश
कि करना है कुछ नया कि हो रहे याद बरसो तक

नहीं करना है बेकार  यह अदबुध कीमती वक्त
कि बहुत मुश्किल से पाया है मानव का यह जन्म

ऐ हवाओ ले चल मुझे उढ़ा कर कही दूर खितिज़ पर
कि पा सकू कुछ बहुत नया इस मानव जीवन में कही

Saturday, October 23, 2010

khwab

दूर गगन के ये चमकीले ,टिमटिमाते ये सितारे
और बीच  में विराजे ये सुंदर चमकीले मामा चंदा

क्यों नहीं मंगाऊ दो पंख इस उरती चिरिया से में
क्यों नहीं पहुचू  में बीच झिलमिलाते सितारों में

कि दूर से बुलाते है ये मुझको उढ़ कर आने को
हां हां अभी  अभी बात हुई है मेरी चंदा मामा से

पर ये क्या दूर नज़र आती है ये सुनहरी किरने
अरे हां यह सुंदर ख्वाब था इस खामोश रातो का

Thursday, October 14, 2010

intzzar

कियोकर न पिए कोही इन सुनसान विरानो में
न दूर तक दिखती है कोई नज़र इन रस भरे बागो में

था इंतज़ार किसी  साकी के आने का
न आये वो घंटो इंतज़ार के बाद भी

कि चाहत थी मुझे छूने कि इन प्यार भरे लम्हों कि
कि अब न आएगी कभी ये रात इन लम्हों को भुलाने कि

आती है आहट बार बार किसी के छम छम कदमो कि
कि आस जाति नहीं उन मध् भरी आँखों कि .

thahake

कियो आज अजीब सी लगती है यह उजली सी धूप
कियो आज लगती है यह हलकी पवन कि सिरहन
कियो आज आती है कानो में अजीब सी सनसनाहट
लियो आज अजीब सी हरकत है इन बाहौ के बालो में

कही ये आगाज़ तो नहीं है किसी मध् भरी आँखों का
कही ये अंदाज़ तो नहीं है किसी के स्वागत करने का
कही ये बयां तो नहीं है उस चंचल हसी भरे ठहाको का
हां यह सच है वोह यही है वोह यही है साथ अपने ठहाको के

Friday, October 8, 2010

sangam

यु तो न थी कभी लहरों में चंचलता
यु तो न था  कभी उफ्फान लहरों में

ऐसा कियो लगता है कि अल्हर सी लगती है ये लहरे
किया कुछ या बहुत कुछ मिल गया है इन बलखाती लहरों को

शायद ये अति खुश है इसलिए कि होना है संगम चांदनी रातो में
अब दूर नहीं है मंजिल इन लहरों से कि निकट है समुंदर संगम को

bandhan

हां यह सच है करता हु प्यार इस हिरन सी आँखों को
हां यह सच है दीवाना हु प्यार में जल से भरी इन आँखों में

हां यह सच है खोया  रहता हु दिन रात इन मदभरी आँखों में
हां यह सच है छीन  लिया  है घर बार मुझसे इन चंचल आँखों ने

अब तो खुवाइश है इस दिल को कि न दूर करे पल भर  मुझको  प्यार भरी आँखों से
या खुदा अब तो इल्तजा है जी भर कर कि बांध दे यह बंधन जीवन भर को

Monday, October 4, 2010

haq

कैसी है दुनिया ,कैसे हे ये लोग
चल रहे है चल रहे है बेखोफ

करते है जुर्म इन्सनिएत पर
कहते है हम इन्सान है

छिनकर हक दूसरो का अपनी झोली में
कहते है हम मालामर है इस टोली में

कहते है हम इज्ज़तदार है करते है प्यार
अरे ऐ इन्सान कब तक सच छुपाएगा इन यारो से

किया होगा उस दिन जब परेगी मार यारो कि
कि मुह ना दिखा पायेगा यारो कि टोली में

Tuesday, September 28, 2010

ahsas

ऐसा क्यों  लगता है कि वोह न आएगा कभी
ऐसा क्यों  लगता है कि प्यार छुट गया मुझसे

क्या  यह अहसास है सच का या धुंधले खियालो का
क्या यह अहसास है उन सुंदर बिताये पलो का

न भूल पाहुंगी उन प्यार भरे मोहक लम्हों  को
कि जीवन कि  अद्बुद भुझी उस प्यार के अहसास को

ऐ खुदा, ऐ परवरदिगार विनती है मेरी इन चरणों में
मिला दे इक बार मेरे बिछरे रूठे खेवनहार को

Monday, September 27, 2010

insaniet

कितना बदल गया है ये इन्सान कि भूल गया इन्सानिएत
न होश उसे चाहत का न होश उसे रिश्तो का, अपनेपन का

न याद उसे उस बचपन कि  न याद उसे उस बीते पलो कि
कि इन पलो पर कितनी प्यार से बिताई थी वो राते और दिन

दूर खंडर सी  नज़र आती  है वो आराम देती वो छत और ईटे
कहा है वो बाग़ और बगीचे जिस में खाए थे खूब शहतूत घनेरे

कहा है वोह बहिन भाई जो थे साथ हर समय हर दुःख सुख में
कहा गयी माँ कि प्यारी गोद और पिता कि प्यार भरी भाए

न दूंड अह दोस्त ये सब कि सब गवा दिया तुमने इस रुपैये कि खातिर
कि सब कुछ लुट गया इस धरती से तुम्हारे इस रुपैये के खातिर

ishwar

वाह ईश्वर वाह कियू  बनाया यह संसार
हर बुत में दी जान कियो बनाया यह संसार

कियो ये नज़ारे बनाये कियो दिखाया इन्हें नजरो से
कियो ये बुत बनाये सांसे दे कर चलने को

कियो ये जबान दी इस दर्द को कहिने को
कियो दर्द दिया इस बुत में सहने को

किया रहम नहीं आया इतना करने पर
कि दे दिया पेट इस बुत में लरने को

वाह ईश्वर वाह कियो बनाया यह संसार
हर बुत में दी जान कियो बनाया संसार

Saturday, September 25, 2010

kashish

कशिश है इन आँखों में कुछ पाने कि
कशिश है इन हाथो में कुछ छूने कि

कशिश  है दिल से निकली आवाज़ होठो पर आने कि
कशिश है अपने अरमान बरसो से  पूरे करने कि

कशिश है दो जवान दिलो के दिल मिलाने कि
कि बरसो से जगी आग अब  मिटाने कि

subah

अजीब सी पहेली है यह जिंदगी
कुछ पास कुछ दूर है ये जिंदगी

कियो कर में इस को उल्जाऊ
कि बहुत प्यारी है ये जिंदगी

उजली सी किरण है ये सुबह
कि प्यार कि इक दिन और

कि कहती  है सदा मुझसे
न दूर रहना कभी अपने प्यार से

Wednesday, September 22, 2010

pyar

तुम निगाओ से दूर हो दिल से नहीं
तुम लबो  से दूर हो लेखन से नहीं

तुम रूबरू नहीं तो किया खियालो से दूर नहीं
तुम रातो को पास नहीं पर ख्वाबो में रात भर हो

तुम न दूर रह पाहोगी कभी इस जिगर से कभी
कि तुम कि तुम रहती हो सदा इन सांसो में सदा

Monday, September 20, 2010

sach

कैसे कहू कि तुम अब वो नहीं जो पहले थी
कैसे कहू कि तुम्हारी निगाहे कुछ और कहती है

कैसे कहू कि तुमारे कदम थिरक गए है
कैसे कहू कि तुमारी चाल कुछ और कहती है

कैसे कहू कि यह मुस्कराना कुछ और बया करता है
कैसे कहू कि तुमारी हसी भुझी भुझी सी लगती  है

कैसे कहू कि आ गले लग के बयां कर दे सचाई
कि तुम वोही हो ,तुम वोही हो ,तुम वोही हो .

Friday, September 17, 2010

khwab

ये रात ऐसी होगी न सोचा था कभी
कि बगल में होंगी उनकी सांसे कभी

पास रह कर भी कियो लगता है दूर मुझे
कि केवल वोह है कि केवल वोह है पास मेरे

कि खियाल है कि हकीकत है पास मेरे
कि डर लगता है अब हकीकत से मुझे

कि छूकर कही ख्वाब टूट न जाये
कि सुंदर पल छटक न जाये

कि अब तो कामना है इसे छूने कि
छूकर करुगा रोशन दुनिया ख्वाबो कि

Wednesday, September 15, 2010

glimpse: ankhe

glimpse: ankhe: "तुम रोज़ कियो इतना पीते हो, पीकर गिर परते हो किया तुमने सोचा है कभी कि इसे तुम पीते हो या ये तुमे पीती है पीने को और बहुत है इस दुनिया म..."

glimpse: paheli

glimpse: paheli: " तुम इक अजीब पहेली ..."

ankhe

तुम रोज़ कियो इतना पीते  हो, पीकर गिर परते हो
किया तुमने सोचा है कभी कि इसे तुम पीते हो या ये तुमे पीती है

पीने को और बहुत है इस दुनिया में, कियो इक ज़हर पीते हो शाम होने को
शाम तो रंगी और खुशनुमा होती है ,कियो नहीं पीते इन मद भरी आँखों से

मदहोश रहती है ये आँखे हमेशा कुछ पाने को ,कि शाम हुई है पाने को
अह दोस्त न पीना दूर  उस ज़हर भरे प्याले को ,कि अमृत भरा है इन दो पास भरे प्यालो में

Tuesday, September 14, 2010

paheli

                                                             






















                                      तुम इक अजीब पहेली हो इस जीवन में 
                                       लगता है इक घनघोर घटा हो जीवन में
                                   
                                      कब बरसोगी मालूम नहीं है मुझे बरसो से 
                                       कब भर दोगी दामन छाल्कागे पैमाने से
                             
                                     अरे अब तो जीवन कि शाम आने को है
                                     कि कब बंद होगी ये आँखे इस पैमाने में







                 

Monday, September 6, 2010

barsat

कह दो इन सितारों को कि इस तरह आया न करे 
कि अभी वक्त नहीं है उनके निकलने   का
कि अभी तक बरसे नहीं थे भरपूर बदरिया ऊपर से
कि अभी तक नहीं प्यास बुझी इस धरती कि

बहुत आस लगाय बैठी है धरती बदरिया से
कि नहीं बरसी है बदरिया पुरे मन से
कि भाहे पसार बैठी है धरती बरसो से
कि कब आकर गले लगती है बदरिया मुझसे

Saturday, September 4, 2010

nazare

कितनी न हसी है यह जिंदगी
हर और हसीं नज़ारे नज़र आते है

हर शाख लहरा रही अपनी धुन में
कि उसे भी चाहत है इन नजारो कि

ओंस कि इन बूंदों के क्या कहने
वोह तो इतरा रही है पतों से लिपट कर

खुशबू से सारोबार किया है इन मदहोश फूलो ने
कि अब वोह कली से फूल बने है बगीचे में

ऐ दोस्त जरा सम्बल कर चलना इन बगीचों में
नाज़ुक है बहुत ये फूल जो सहर में बने है कली से

Sunday, August 29, 2010

aadmi

लूटता है आदमी को आदमी ,घर आदमी का जलाता है आदमी
जान लेता है आदमी कि आदमी ,खून आदमी का बहाता है आदमी

कितना बेबस है फिर भी ,हाथ खाली जाता है आदमी
इतना खुदगर्ज़ है कि कागज़ के टुक्रो पर बिक जाता है आदमी

नीलाम करता है अपने खुद का जमीर ,खुद ही अपनी बोली लगता है आदमी
     कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी

करता है फरेब अपनों से ,लहू अपनों का बहाता है आदमी
शोहरत कि होढ में ,नाम कितना मिटाता है आदमी
   कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी

दर्द कितना सहता है ,कितने गम उठता है आदमी
बुझा कर रात रहते ही चिराग ,रौशनी कल के लिए बचाता है आदमी
        कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी

चार दिन कि जिंदगी में आराम का हर सामान जुटाता है आदमी
      कितना बेबस है फिर भी खाली हाथ जाता है आदमी

yade

रात का भी अजब आलम होता है
देख तारो को यादे छाही रहती है

मदहोश कर देती है उनकी आहट पर
कि वोह नहीं केवल कल्पना है उनकी

क्या होगा जब रूबरू होंगे उनसे
यह सोच पसीने पसीने होई जाते है

या खुदा ये ख्वाइश है अब मेरी
कि उनकी यादो में ही खोही रहू जीवन भर

khwab

आशा इक किरण है जिदगी कि
आशा इक खुबसूरत  ख्वाब   है

आशा जीने कि चाहत है जिंदगी
कि जिंदगी इक खुबसूरत लम्हा है हर पल

कि आनंद और मज़ा है इन ख्वाबो  में
कि आशा इक खुबसूरत ख्वाब है

क्या कभी पूछा है ख्वाबो से जी भर कर
कि कब हसी बन कर गले लगगे मुझ से

आयेगे जरूर आयेगे मुझे गले लगाने
कि स्वागत में आँखे बिछाए द्वार खरी हु में

Saturday, August 28, 2010

pyar

ये माना कि तुम जीवन संगनी हो
ये माना कि तुम मेरी अर्धांग्नी हो

ये माना कि तुम मेरी जीवन सफ़र हो
ये माना कि तुम मेरी अमिट मित्र हो

ये माना कि यह सुहाना सफ़र है
ये माना कि हम साइकिल के दो पहिये है

पर तुम मानों यह बात जीवन भर
कि हम इक दुसरे के लिए जन्मे है

Thursday, August 26, 2010

Madhubala and Dilip Kumar video

pyar

तुम मेरे प्यार हो         इस जीवन के पतवार हो
नहीं चलेगी अकेले        यह जीवन कि रस भरी नैया

नहीं चाहिए मुझे          कुछ और तुमरे सिवाह
कि तुम्ही हो मेरे           सब कुछ खेवनहार  पिया

सब कुछ मिला है मुझे      इक तुम्हे पाकर पिया
अब और नहीं इच्छा         इस परवरदिगार से पाने कि

Sunday, August 22, 2010

Malika Pukhraj Aur Tahira Syed - Abhi To Main Jawan Hoon

WOH BATEIN TERI - TAHIRA SYED

pyar

तुम से जीना सीख लिया
तुम से मरना सीख लिया
न अब कोही गम दुनिया से
कि अब मर जिह कर देख लिया

यह सच है तुम प्यार से प्यारी हो
यह सच है तुम जान हमारी हो
पर न सिखाया हमको दूर जाने को 
न रहोगे तुम अगर मर जायेंगे हम

jadu

उसकी आँखों में वो जादू है 
करती है बेहोश सभी को 
अगर  होश में रहे मदहोश लगते है
न होश रहे कुछ करने को

तुम्हे वास्ता है खुदा का
न देख यु जी भर कर सभी को
कि देखने वाले लाइन में लगे है
यु मिट कर मरने वालो में