Saturday, November 20, 2010
Wednesday, November 17, 2010
pyar
आखिर यह प्यार क्या चीज है
जिसमे हम सभी बेबस है इसे पाने को
लगता है सब सूना अपने चारो और
भुझी भुझी सी आँखे भुझा भुझा चेहरा
लगती है खामोश फिझाए हर कही
नहीं लगता योवन इन उमरती घटाओ में
नहीं दिखती खिलखिलाहट इन रंगीले फूलो में
कि प्यार नहीं है मेरा इन चाहत भरी नजरो में
जिसमे हम सभी बेबस है इसे पाने को
लगता है सब सूना अपने चारो और
भुझी भुझी सी आँखे भुझा भुझा चेहरा
लगती है खामोश फिझाए हर कही
नहीं लगता योवन इन उमरती घटाओ में
नहीं दिखती खिलखिलाहट इन रंगीले फूलो में
कि प्यार नहीं है मेरा इन चाहत भरी नजरो में
pyar
क्यों कोही पूछे मुझसे ये राज़ कि बाते
कि वोह न था कभी राजदार मुझसे कभी
बीत गयी वो राते ,बीत गयी वो बाते
बीत गए वो पल ,बीत गयी वो प्यार भरी बाते
यादगार रह गए वो सुनहरे प्यार भरे पल
याद रह गई वो वोह प्यार भरी कसमे
न भुला पाहुंगा में यह सभी जीवन भर
कि तुम आज भी बसी हो मेरे तन मान में
कि वोह न था कभी राजदार मुझसे कभी
बीत गयी वो राते ,बीत गयी वो बाते
बीत गए वो पल ,बीत गयी वो प्यार भरी बाते
यादगार रह गए वो सुनहरे प्यार भरे पल
याद रह गई वो वोह प्यार भरी कसमे
न भुला पाहुंगा में यह सभी जीवन भर
कि तुम आज भी बसी हो मेरे तन मान में
Tuesday, November 9, 2010
sapne
सपने जरुर होने चाहिए हर जिंदगी में
कि उसे पूरा करने में अपने को डाल देना चाहये
कि सपने अपनी उमीद है कि सपने अपनी आशा है
कि सपनो में जीने का अपना निराला अंदाज़ है
क्यों नहीं होंगे पूरे सपने हर इंसान के इस धरती पर
कि बेइंतिहा सौन्द्रिय बिखरा परा है इस धरती पर
क्यों नहीं जिए हर वो ख़ुशी से इस संसार में
कि नहीं मिलती मानव योनी हर इक जीव को संसार में
कि उसे पूरा करने में अपने को डाल देना चाहये
कि सपने अपनी उमीद है कि सपने अपनी आशा है
कि सपनो में जीने का अपना निराला अंदाज़ है
क्यों नहीं होंगे पूरे सपने हर इंसान के इस धरती पर
कि बेइंतिहा सौन्द्रिय बिखरा परा है इस धरती पर
क्यों नहीं जिए हर वो ख़ुशी से इस संसार में
कि नहीं मिलती मानव योनी हर इक जीव को संसार में
Saturday, November 6, 2010
adbudh jeevan
सर्द सर्द पवन के झोंके लिए इस सुबह का स्वागत है
कि रात अभी अभी ख़तम हुई है काले सायो के साथ
सूर्य कि उजली धुप मानो दे रही है नया सन्देश
कि करना है कुछ नया कि हो रहे याद बरसो तक
नहीं करना है बेकार यह अदबुध कीमती वक्त
कि बहुत मुश्किल से पाया है मानव का यह जन्म
ऐ हवाओ ले चल मुझे उढ़ा कर कही दूर खितिज़ पर
कि पा सकू कुछ बहुत नया इस मानव जीवन में कही
कि रात अभी अभी ख़तम हुई है काले सायो के साथ
सूर्य कि उजली धुप मानो दे रही है नया सन्देश
कि करना है कुछ नया कि हो रहे याद बरसो तक
नहीं करना है बेकार यह अदबुध कीमती वक्त
कि बहुत मुश्किल से पाया है मानव का यह जन्म
ऐ हवाओ ले चल मुझे उढ़ा कर कही दूर खितिज़ पर
कि पा सकू कुछ बहुत नया इस मानव जीवन में कही
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