Sunday, June 26, 2011

pyaar

कितने अजीब ख्याल है इस समाज के
सिर्फ अपने रिवाज़ है इस समाज के
कुछ ख्याल नहीं है इस नहीं पीढ़ी का
क्या उन्हें हक नहीं है अपने हिसाब से जीने का

माना उन्हें तजुर्बा है जिंदगी जीने का
पर वो क्यों भूल गए है नयी खुशियों को
कि ख़ुशी बाटने से मिलती है खुशियाँ
कि प्यार है इस दुनिया में रोशन अभी

कि नहीं रोकना चाहिए किसी कि खुशियों को
कि हर जगह बसता है  हर दिल में ईश्वर सभी के
दो खुशिया लो खुशिया है यह दस्तूर दुनिया का
कि प्यार से रोशन है दस्तूर दुनिया का