Sunday, September 25, 2011

love

ये रात की तन्हाई अजब सा अहसास कराती है
कुछ भूली हुई यादे रह रह कर जागुर्त हो उठती है

आँखों की नींद लगती  है कोसो दूर इन आँखों में
उभर उठते है वो खुबसूरत चित्र रह रह कर इन आँखों में

कि मन नहीं भूलता वो तनहा खुबसूरत प्यार का मंज़र
कि तब वो थे और उनके प्यार के लाजवाब कहकहे

कि घंटो बीत जाते थे सिर रख कर उनकी गोदी में
हां वो प्यार था एक अहसास था उन खुबसूरत पलो का

आखिर क्योकर भूले हम उनको ,कहा गए वो पल प्यार के
कि न रही वो खुबसूरत राते ,कि न रहे उनके कहकहे .

morning

जी भर कर नमन है बसंत की इस प्रभात वेला को
रिम जिम बुँदे टपक रही है रह रह कर पावन धरती पर

हां अब टहनिया लहरा रही है मंद मंद समर के साथ
ऐसे  झूल रही है लदे महकते गुलाब के  घुछो के साथ

चंदा भी शर्मा रहा है देख देख कर महकते गुलाब को
कि हो  जाना है उसे अब ओजल कि आने को है उजाला

लाली गुलाब कि छिरक आही है कि आगमन उजाले का
कि सूर्य दर्शन को है तेयार जग में अंधियारे के बाद

कोटि कोटि नमन है सूर्य को जग में उजियारे के साथ
कि है शुरुआत  जग में नए दिन कि उजियारे के साथ

Saturday, September 24, 2011

julfe

जुल्फे है या गुलाब की पंखरिया
लहराती है कही छू छू कर गालो को

क्या ये अदा है या अंदाज़ खुबसूरत चेहरे का
या है एक लहर इस मतवाले जिस्म  का

क्योकर न इतराए कोही अन्दाज़ा बया कर
कि ख़ामोशी बताती है अपना अंदाज़ कुछ और

कि दूर रहना ऐ मनचले इन आग कि लपटों से
कि कांटे भी साथ है इन गुलाब कि पंखुरियो में

Monday, September 19, 2011

ये नयन तेरे मतवाले लगे भरपूर मद के प्याले
डुबोए है सब को कर कर मदहोश नयन ये प्यारे

क्यों ये हुस्न दिया  खुदा ने इन मध् भरे नैनो वाली को
कि करती है बेहोश सढ़को पर अपने हुस्न के दीवानों को

ठुमक ठुमक चलती है ये सढ़को पर कि गिरते है दीवाने सढ़को पर
कि मुढ़ मुढ़ कर देखते है इन्हें हर उम्र के परवाने इन्हें

रहम कर हे खुदा इस बन्दे पर कि दाग न लगे इस जिस्म पर
कि बहुत जतन से पाई है ये दौलत इज्ज़त कि बरसो खिदमत के बाद

Saturday, September 3, 2011

saawan

मंद मंद समीर है ,अंदाज़ मौसम का कुछ और है
बादल गरज गरज कर कह रहे है ,जैसे अपने होने का अहसास करा रहे है

फूलो की डालिया झूम झूम कर इतरा रही है ,नन्ही कलियाँ खामोश है
खिले फूल इंतज़ार मै है शायद लेने आगोश में कि किसी प्रियतम  को

खुशबू बिखेर दी है गुलाब ने सब और कि झूम उठा है हर कोही सब और
हां भाई हां बरस परी है अब काली घटाए सब और कि नाच उठा है सावन सब और .