जिंदगी अजीब सी पहेली है
इक अजीब सी सहेली है
क्यों न गले लगाये इसको
क्यों न मुस्कराए इससे
क्यों न इतराए हम मिलके इससे
क्यों न गले लगाये इसको
Friday, December 24, 2010
Tuesday, December 14, 2010
pyaar
क्यों है ये ज़िन्दगी इतनी खफा हमसे
क्यों है खुशिया दूर इतनी सदा हमसे
क्या प्यार अब किताबे के किसे है केवल
क्या मतलब बदल गया प्यार का इस जहाँ में
क्या रिश्ते ,क्या नाते ,क्या दोस्त, क्या हम प्याले
अब नज़र आता है हर कही पैसा और पैसा और पैसो का प्यार
ऐ दोस्त मत भूल कि यह है चलता सिक्का ,नहीं रुकता कही
क्या मुकाबला करेगा ये प्यार से कि खुद का कोही ठिकाना नहीं
क्यों है खुशिया दूर इतनी सदा हमसे
क्या प्यार अब किताबे के किसे है केवल
क्या मतलब बदल गया प्यार का इस जहाँ में
क्या रिश्ते ,क्या नाते ,क्या दोस्त, क्या हम प्याले
अब नज़र आता है हर कही पैसा और पैसा और पैसो का प्यार
ऐ दोस्त मत भूल कि यह है चलता सिक्का ,नहीं रुकता कही
क्या मुकाबला करेगा ये प्यार से कि खुद का कोही ठिकाना नहीं
Thursday, December 9, 2010
patther raah ka
यह पत्थर है राह का ,देखता है हर इक को
जो न देखे इसे राह में ,धूल में मिलता है वोह
कुदरत का अजब करिश्मा है ये ,काम आता है यह सब के
रहने को देता है साथ सबको ,कि महल भी बनवाता है किसी का
कि फोढ़ देता है सर भी किसी का ,कि नज़रे फेर दी किसी ने
कि ऐ इंसान सँभाल कर चल ,कि कभी मंदिर में पूजता है यह पत्थर
कि न कर गुमान ऐ इंसान इस जग में ,बसता है ईश्वर हर किसी में
मत भूल कि कुछ न लाया था इस जग में ,न भूल कि कुछ न ले जाएगा इस जग से
जो न देखे इसे राह में ,धूल में मिलता है वोह
कुदरत का अजब करिश्मा है ये ,काम आता है यह सब के
रहने को देता है साथ सबको ,कि महल भी बनवाता है किसी का
कि फोढ़ देता है सर भी किसी का ,कि नज़रे फेर दी किसी ने
कि ऐ इंसान सँभाल कर चल ,कि कभी मंदिर में पूजता है यह पत्थर
कि न कर गुमान ऐ इंसान इस जग में ,बसता है ईश्वर हर किसी में
मत भूल कि कुछ न लाया था इस जग में ,न भूल कि कुछ न ले जाएगा इस जग से
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