सुबह का समय प्रकृति का निराला अंदाज़ है
पक्षियों की चहचहाहट वातावरण को और मोहक बना देती है
कानो में कौयल की कु कु मधुर रस से सरोबार कर देती है
सहसा मन व्याकुल हो उठता है उसे निहारने को
हरे घास पर ओंस की बुँदे अपनी अलग ही छटा बिखेरती है
सहसा मन स्वयं ही पाँव रखने को थिरक कर खिचा चला जाता है
तभी अचानक मस्त हवा के झोंके ने दामन में सिरहन कर दी
तब यह अहसास हुआ कि में सुबह के सुहावने मौसम में कुदरत के साथ हु
तबी बहुत ही कुर्बत से जबान से शब्द निकले "कि वाह मालिक वाह "
क्या तुमने दुनिया बनाई कि बार बार सजदा करने को जी करता है