ये दुनिया ये दुनिया हाय हमारी ये दुनिया जिधर देखो अजीब नज़ारा कही ठहाके लगते लोग कही रोते हुए लोग कही झोंपढ़ी में सोते लोग कही महलो में सोते लोग कही मंदिर में होते पूजा करते लोग कही शराबखाने में पीते शराब लोग कही मिलते प्यार करते लोग तो कही मिलते झगड़ते लोग ये दुनिया ये दुनिया हाय हमारी ये दुनिया सच है ज़िन्दगी को समझना बहुत मुश्किल काम है व्यक्ति इस दुनिया में आता है अपनी मर्ज़ी से नहीं न ही जाता है अपनी मर्ज़ी से ये सब ईश्वर की मर्ज़ी से चलता है जो उसे मंज़ूर होता है वो ही होता है यह सृष्टि का नियम है पर जिंदगी कैसे गुजरे यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कैसा वो दूसरे व्यक्ति से व्यवहार करे और मेल मिलाप बढ़ाये और एक दूसरे के प्रीति काम आये और जिंदगी खुशाल बने जब तक जिन्दा रहे इस अनोखी दुनिया में ये बहुत जरुरी है की वो दोनों एक दूसरे को अछि तरह समझे और विचारो को आदान प्रदान करे विचारो का मिलना एक दूसरे को और करीब लाएगा वो अधिक देर आपस में मिल कर एक दूसरे के दुख दर्द समझेंगे जो अधिक जरुरी है जीवन गुजारने के हज़ारो वस्तुओ की जरुरत होती है कही होती है कही नहीं होती कही के लिए मेहनत करनी परती है कही आसानी से मिल जाती है यह सुर्ष्टि का नयम है की व्यक्ति खुदगर्ज़ होता है वो पहले अपने लिए सोचता है फिर परिवार के लिए फिर यार दोस्तों के लिए फिर समाज के लिए खुदगर्ज़ होना बुरा नहीं है पर खुदगर्ज़ी के लिए दूसरे की चीजे हरप ले या पाने के लिए उसे दुःख देवे यह नैतिकता का पतन है व्यक्ति को सबसे पहले प्यार से हर व्यक्ति से बात करनी है प्यार कभी भी नफरत या ईर्ष्या में तब्दील नहीं होना चाहिए यहाँ ही व्यक्ति की जीत है उसी में ही जिंदगी का मज़ा है इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति सम्पूर्ण नहीं है हर एक में कोई न कोई कमी होती है तो दूसरे व्यक्ति को कभी भी दूसरे की कमी को न देखनी चाहिए उसके हमेशा गुण देखने चाहिए ये अछि जिंदगी गुजरने का सार है