ये हकीक़त है या ख्वाब या एक अहसास
झलक है उसकी या एक मुर्ग्त्रिश्ना रेतो की
ये मुस्कराना और जुल्फों का लहराना मस्त हवा के झोंको में
दुपट्टा उरता है कही तो नज़रे निहारती है कही ,लगता है मन है कही
हां यह न ख्वाब न मृगतृष्णा यह एक हकीक़त है प्यार के इकरार की
हां क्यों न नाचे मन झूम झूम कर क़ि मिल गया है एक तोहफा प्यार का