क्यों है ये ज़िन्दगी इतनी खफा हमसे
क्यों है खुशिया दूर इतनी सदा हमसे
क्या प्यार अब किताबे के किसे है केवल
क्या मतलब बदल गया प्यार का इस जहाँ में
क्या रिश्ते ,क्या नाते ,क्या दोस्त, क्या हम प्याले
अब नज़र आता है हर कही पैसा और पैसा और पैसो का प्यार
ऐ दोस्त मत भूल कि यह है चलता सिक्का ,नहीं रुकता कही
क्या मुकाबला करेगा ये प्यार से कि खुद का कोही ठिकाना नहीं
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