बागो में कलियों की बहार है
कि इंतज़ार है उन्हें खिलने का
कि पोधो कि डालियों में गुजारे है दिन चार
कि इंतज़ार है कि सजने और सवरने का
कि शोभा बने किसी पावन मंदिर कि
कि चरणों में अर्पित हो ईश्वर के
या फिर शोभा बने किसी के माथे कि
या गजरा बने के सुंदर बालो का
कि इंतज़ार है उन्हें खिलने का
कि पोधो कि डालियों में गुजारे है दिन चार
कि इंतज़ार है कि सजने और सवरने का
कि शोभा बने किसी पावन मंदिर कि
कि चरणों में अर्पित हो ईश्वर के
या फिर शोभा बने किसी के माथे कि
या गजरा बने के सुंदर बालो का
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