क्यों होती है सोच आगे की
क्यों आती है याद बार बार उसकी
क्यों नहीं जाती वो दिल और दिमाग से
क्या कहना चाहती है आखिर वो मेरे दिमाग को
क्यों नहीं में समझता में उसके इशारों को
क्या रहस्य है आखिर उसके बार बार आने को
क्या में नादान समझ पाउँगा उसके इशारों को
क्या यह कोई प्यार का अजीब अहसास है मेरे अंदर
कैसे पाऊ में मतलब इस अजीब पहेली का
है जरूर कुछ इन इशारों में जो कहना चाहती है वो अब तक
कर दे ईश्वर कुछ ऐसा की में मतलब पाह जाऊ जल्दी इस गुथी का
क्यों आती है याद बार बार उसकी
क्यों नहीं जाती वो दिल और दिमाग से
क्या कहना चाहती है आखिर वो मेरे दिमाग को
क्यों नहीं में समझता में उसके इशारों को
क्या रहस्य है आखिर उसके बार बार आने को
क्या में नादान समझ पाउँगा उसके इशारों को
क्या यह कोई प्यार का अजीब अहसास है मेरे अंदर
कैसे पाऊ में मतलब इस अजीब पहेली का
है जरूर कुछ इन इशारों में जो कहना चाहती है वो अब तक
कर दे ईश्वर कुछ ऐसा की में मतलब पाह जाऊ जल्दी इस गुथी का
No comments:
Post a Comment