रात का भी अजब आलम होता है
देख तारो को यादे छाही रहती है
मदहोश कर देती है उनकी आहट पर
कि वोह नहीं केवल कल्पना है उनकी
क्या होगा जब रूबरू होंगे उनसे
यह सोच पसीने पसीने होई जाते है
या खुदा ये ख्वाइश है अब मेरी
कि उनकी यादो में ही खोही रहू जीवन भर
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