Monday, April 4, 2011

insaan

आखिर क्यों ये जहाँ बसाया तुमने मालिक
इक कठपुतली बना के भेजा इस जहाँ में

क्यों बनाये तुमने इतने बागबगीचे इस धरती पर
पर नहीं जगह दी इस इंसान को चैन कि नींद लेने को

क्यों बनाये ये महल और ये सुंदर इमारते इस धरती पर
पर नहीं जगह दी इसमें दो पल मुह छुपाने को

क्या देख कर इंसान जी सकेगा उम्र भर इस धरती पर
क्या भूख अपने तन कि और मन कि मिटा पायेगा इस धरती पर

आखिर क्यों ये जहाँ बसाया तुमने मालिक
इक कठपुतली बना के भेजा इस जहाँ में  

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