आखिर क्यों ये जहाँ बसाया तुमने मालिक
इक कठपुतली बना के भेजा इस जहाँ में
क्यों बनाये तुमने इतने बागबगीचे इस धरती पर
पर नहीं जगह दी इस इंसान को चैन कि नींद लेने को
क्यों बनाये ये महल और ये सुंदर इमारते इस धरती पर
पर नहीं जगह दी इसमें दो पल मुह छुपाने को
क्या देख कर इंसान जी सकेगा उम्र भर इस धरती पर
क्या भूख अपने तन कि और मन कि मिटा पायेगा इस धरती पर
आखिर क्यों ये जहाँ बसाया तुमने मालिक
इक कठपुतली बना के भेजा इस जहाँ में
इक कठपुतली बना के भेजा इस जहाँ में
क्यों बनाये तुमने इतने बागबगीचे इस धरती पर
पर नहीं जगह दी इस इंसान को चैन कि नींद लेने को
क्यों बनाये ये महल और ये सुंदर इमारते इस धरती पर
पर नहीं जगह दी इसमें दो पल मुह छुपाने को
क्या देख कर इंसान जी सकेगा उम्र भर इस धरती पर
क्या भूख अपने तन कि और मन कि मिटा पायेगा इस धरती पर
आखिर क्यों ये जहाँ बसाया तुमने मालिक
इक कठपुतली बना के भेजा इस जहाँ में
No comments:
Post a Comment