Saturday, July 23, 2011

rahmat khuda ki

बरसात के बाद खिली हुई धूप मौसम को निखार देती है
ऐसे लगता है जैसे चारो और चांदनी सिमट कर धरती पर आई है

पक्षियों की चहचहाहट और कोयल की कु कु व्यक्ति को सहज आकर्षित करती है
मखमली सी हरी घास ,झरनों का संगीत फूलो की खुशबू की घटा निराली है

क्यों नहीं मन नाचे हिलोर हिलोर क्यों नहीं स्वर निकले झूम झूम कर
कि  बरसी है रहमत इस परवरदिगार की इन कोमल अंगो पर

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