बरसात के बाद खिली हुई धूप मौसम को निखार देती है
ऐसे लगता है जैसे चारो और चांदनी सिमट कर धरती पर आई है
पक्षियों की चहचहाहट और कोयल की कु कु व्यक्ति को सहज आकर्षित करती है
मखमली सी हरी घास ,झरनों का संगीत फूलो की खुशबू की घटा निराली है
क्यों नहीं मन नाचे हिलोर हिलोर क्यों नहीं स्वर निकले झूम झूम कर
कि बरसी है रहमत इस परवरदिगार की इन कोमल अंगो पर
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