Friday, November 25, 2011

subah


क्यों आती है यह सुबह रोज़
क्यों खिलते है ये फूल रोज़
क्यों खिलते है नए पत्ते रोज़
आती है फिर ओंस रोज़ सुबह
हां फिर खुलती है नींद रोज़ सुबह
की सूर्य जगाता है नए नूतन दिन में
की देता है सन्देश कुछ नया करने को
की काली अँधेरी रात गई भाग अब
की कुदरत ने छटा बिखेरी है प्यार की
की लहरा रही है फसल झूम झूम कर
की प्यार कर की प्यार कर

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