अथाह सागर है भरा हुआ है किद्विन्तियो से
किधर से करे शुरुआत करे हकीक़तो के कोने से
अजीब है यह जानना कि कैसा था इंसान
शुरू के धरती के इन कुदरत के इन विरानो में
है अजीब खेल ये धरती पर इश्वर के अगिनित खेलोs में
कि कठपुतली बना के भेजा मिटी के इस मानव को
कि मजे लेता है रोज़ इन्सान के अध्बुद करतबों के
कही लड़ता है कही करता है प्यार वो मिटी के पुतलो से
करता है ये खेल जिंदगी भर इन खुबसूरत नजारों में
कि जब तक बंधी है यह डोर सांस कि इस मिटी के पुतले में
किधर से करे शुरुआत करे हकीक़तो के कोने से
अजीब है यह जानना कि कैसा था इंसान
शुरू के धरती के इन कुदरत के इन विरानो में
है अजीब खेल ये धरती पर इश्वर के अगिनित खेलोs में
कि कठपुतली बना के भेजा मिटी के इस मानव को
कि मजे लेता है रोज़ इन्सान के अध्बुद करतबों के
कही लड़ता है कही करता है प्यार वो मिटी के पुतलो से
करता है ये खेल जिंदगी भर इन खुबसूरत नजारों में
कि जब तक बंधी है यह डोर सांस कि इस मिटी के पुतले में
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