Saturday, November 6, 2010

adbudh jeevan

सर्द सर्द पवन के झोंके लिए इस सुबह का स्वागत है
कि रात अभी अभी ख़तम हुई है काले सायो के साथ

सूर्य कि उजली धुप मानो दे रही है नया सन्देश
कि करना है कुछ नया कि हो रहे याद बरसो तक

नहीं करना है बेकार  यह अदबुध कीमती वक्त
कि बहुत मुश्किल से पाया है मानव का यह जन्म

ऐ हवाओ ले चल मुझे उढ़ा कर कही दूर खितिज़ पर
कि पा सकू कुछ बहुत नया इस मानव जीवन में कही

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