आखिर यह प्यार क्या चीज है
जिसमे हम सभी बेबस है इसे पाने को
लगता है सब सूना अपने चारो और
भुझी भुझी सी आँखे भुझा भुझा चेहरा
लगती है खामोश फिझाए हर कही
नहीं लगता योवन इन उमरती घटाओ में
नहीं दिखती खिलखिलाहट इन रंगीले फूलो में
कि प्यार नहीं है मेरा इन चाहत भरी नजरो में
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