क्यों कर आखिर समजाऊ इस दिल को बार बार
क्यों भटकता है आखिर दिल बार बार समजने को
ये दर्द की दुनिया है समेटे हर इक दर्द पिलाने को
कहाँ तक इंसान सहेगा इस बेदर्द ज़माने को
रहम कर ऐ खुदा इस बन्दे पर रहने को इस ज़माने में
कि भेजा है आखिर आपने इस बन्दे को ज़ालिम ज़माने में
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