कभी महसूस होता है अकेला हु ,कभी महसूस होता है सब साथ है
कैसी ये उलझन है ,कैसी ये बेचेनी है ,लगता है पीछे रह गया हु सबसे
क्यों होता है इंसान खफा सबसे ,कही यह तो नहीं खफा है अपने से
लिखा है सब किताबो में कि प्यार सबसे ऊपर है इस जहाँ में ,पर है कहाँ
मोहब्बत ,प्यार ,इश्क मरना ,मिटना ,है सब किताबो कि दुनिया इस जहाँ में
है और भी बहुत काम इस जहाँ में ,कि नहीं है सिर्फ मोहब्बत इस जहाँ में
अफसाने बनते है बिगरते है इस जहाँ में रोज़ कि किस्से रह जाते है यादों में
कि खुश रह ऐ दोस्त इस जहाँ में ,कि नहीं है सिर्फ मोहब्बत इस जहाँ में

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