हां यह सच है करता हु प्यार इस हिरन सी आँखों को
हां यह सच है दीवाना हु प्यार में जल से भरी इन आँखों में
हां यह सच है खोया रहता हु दिन रात इन मदभरी आँखों में
हां यह सच है छीन लिया है घर बार मुझसे इन चंचल आँखों ने
अब तो खुवाइश है इस दिल को कि न दूर करे पल भर मुझको प्यार भरी आँखों से
या खुदा अब तो इल्तजा है जी भर कर कि बांध दे यह बंधन जीवन भर को
No comments:
Post a Comment