Saturday, October 23, 2010

khwab

दूर गगन के ये चमकीले ,टिमटिमाते ये सितारे
और बीच  में विराजे ये सुंदर चमकीले मामा चंदा

क्यों नहीं मंगाऊ दो पंख इस उरती चिरिया से में
क्यों नहीं पहुचू  में बीच झिलमिलाते सितारों में

कि दूर से बुलाते है ये मुझको उढ़ कर आने को
हां हां अभी  अभी बात हुई है मेरी चंदा मामा से

पर ये क्या दूर नज़र आती है ये सुनहरी किरने
अरे हां यह सुंदर ख्वाब था इस खामोश रातो का

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