कियो आज अजीब सी लगती है यह उजली सी धूप
कियो आज लगती है यह हलकी पवन कि सिरहन
कियो आज आती है कानो में अजीब सी सनसनाहट
लियो आज अजीब सी हरकत है इन बाहौ के बालो में
कही ये आगाज़ तो नहीं है किसी मध् भरी आँखों का
कही ये अंदाज़ तो नहीं है किसी के स्वागत करने का
कही ये बयां तो नहीं है उस चंचल हसी भरे ठहाको का
हां यह सच है वोह यही है वोह यही है साथ अपने ठहाको के
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