Thursday, October 14, 2010

thahake

कियो आज अजीब सी लगती है यह उजली सी धूप
कियो आज लगती है यह हलकी पवन कि सिरहन
कियो आज आती है कानो में अजीब सी सनसनाहट
लियो आज अजीब सी हरकत है इन बाहौ के बालो में

कही ये आगाज़ तो नहीं है किसी मध् भरी आँखों का
कही ये अंदाज़ तो नहीं है किसी के स्वागत करने का
कही ये बयां तो नहीं है उस चंचल हसी भरे ठहाको का
हां यह सच है वोह यही है वोह यही है साथ अपने ठहाको के

No comments:

Post a Comment