ये रात की तन्हाई अजब सा अहसास कराती है
कुछ भूली हुई यादे रह रह कर जागुर्त हो उठती है
आँखों की नींद लगती है कोसो दूर इन आँखों में
उभर उठते है वो खुबसूरत चित्र रह रह कर इन आँखों में
कि मन नहीं भूलता वो तनहा खुबसूरत प्यार का मंज़र
कि तब वो थे और उनके प्यार के लाजवाब कहकहे
कि घंटो बीत जाते थे सिर रख कर उनकी गोदी में
हां वो प्यार था एक अहसास था उन खुबसूरत पलो का
आखिर क्योकर भूले हम उनको ,कहा गए वो पल प्यार के
कि न रही वो खुबसूरत राते ,कि न रहे उनके कहकहे .

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