जुल्फे है या गुलाब की पंखरिया
लहराती है कही छू छू कर गालो को
क्या ये अदा है या अंदाज़ खुबसूरत चेहरे का
या है एक लहर इस मतवाले जिस्म का
क्योकर न इतराए कोही अन्दाज़ा बया कर
कि ख़ामोशी बताती है अपना अंदाज़ कुछ और
कि दूर रहना ऐ मनचले इन आग कि लपटों से
कि कांटे भी साथ है इन गुलाब कि पंखुरियो में
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