Saturday, September 3, 2011

saawan

मंद मंद समीर है ,अंदाज़ मौसम का कुछ और है
बादल गरज गरज कर कह रहे है ,जैसे अपने होने का अहसास करा रहे है

फूलो की डालिया झूम झूम कर इतरा रही है ,नन्ही कलियाँ खामोश है
खिले फूल इंतज़ार मै है शायद लेने आगोश में कि किसी प्रियतम  को

खुशबू बिखेर दी है गुलाब ने सब और कि झूम उठा है हर कोही सब और
हां भाई हां बरस परी है अब काली घटाए सब और कि नाच उठा है सावन सब और .

No comments:

Post a Comment