ऐसा क्यों लगता है कि वोह न आएगा कभी
ऐसा क्यों लगता है कि प्यार छुट गया मुझसे
क्या यह अहसास है सच का या धुंधले खियालो का
क्या यह अहसास है उन सुंदर बिताये पलो का
न भूल पाहुंगी उन प्यार भरे मोहक लम्हों को
कि जीवन कि अद्बुद भुझी उस प्यार के अहसास को
ऐ खुदा, ऐ परवरदिगार विनती है मेरी इन चरणों में
मिला दे इक बार मेरे बिछरे रूठे खेवनहार को
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