कैसे कहू कि तुम अब वो नहीं जो पहले थी
कैसे कहू कि तुम्हारी निगाहे कुछ और कहती है
कैसे कहू कि तुमारे कदम थिरक गए है
कैसे कहू कि तुमारी चाल कुछ और कहती है
कैसे कहू कि यह मुस्कराना कुछ और बया करता है
कैसे कहू कि तुमारी हसी भुझी भुझी सी लगती है
कैसे कहू कि आ गले लग के बयां कर दे सचाई
कि तुम वोही हो ,तुम वोही हो ,तुम वोही हो .
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