Friday, September 17, 2010

khwab

ये रात ऐसी होगी न सोचा था कभी
कि बगल में होंगी उनकी सांसे कभी

पास रह कर भी कियो लगता है दूर मुझे
कि केवल वोह है कि केवल वोह है पास मेरे

कि खियाल है कि हकीकत है पास मेरे
कि डर लगता है अब हकीकत से मुझे

कि छूकर कही ख्वाब टूट न जाये
कि सुंदर पल छटक न जाये

कि अब तो कामना है इसे छूने कि
छूकर करुगा रोशन दुनिया ख्वाबो कि

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